मुंबई वालों के लिए एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। Loop Health की Workforce Health Index 2026 के मुताबिक मुंबई ब्लड शुगर के मामले में देश के पांच बड़े मेट्रो शहरों में सबसे खराब स्थिति में है। यहां 46.8% लोगों की ब्लड शुगर रिपोर्ट में शुगर का स्तर सामान्य से ज्यादा पाया गया, यानी प्री-डायबिटीज या डायबिटीज की रेंज में। यह आंकड़ा बेंगलुरु से 16.1 प्रतिशत पॉइंट ज्यादा है, जहां यह समस्या पांचों शहरों में सबसे कम (30.7%) है।
यह रिपोर्ट 11,427 हेल्थ रिपोर्ट्स, 9,097 सर्वे जवाबों और 8 लाख से ज्यादा बायोमार्कर्स के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें सामने आया है कि 30 की उम्र के हर तीन में से एक प्रोफेशनल का ब्लड शुगर पहले से गड़बड़ हो चुका है। वहीं, इसी उम्र में 10.3% पुरुषों और 4.3% महिलाओं की रिपोर्ट डायबिटीज रेंज में पाई गई। दरअसल, यह बीमारी अब बुढ़ापे का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही है।
मुंबई ब्लड शुगर: महिलाओं और युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
मुंबई में महिलाओं की स्थिति और भी चिंताजनक है। आधी महिलाओं की ब्लड शुगर रिपोर्ट में स्तर ज्यादा पाया गया, और पांचों मेट्रो में यहां लैंगिक अंतर सबसे बड़ा है। वहीं, 17.1% रिपोर्ट्स में HbA1c 6.5% या उससे ऊपर पाया गया, जो डायबिटीज की रेंज है। इसके अलावा मुंबई में पुरुषों और महिलाओं दोनों में हीमोग्लोबिन की कमी भी सबसे ज्यादा पाई गई। हालांकि, रिपोर्ट में यह साफ किया गया है कि ये आंकड़े टेस्ट कराने वालों पर आधारित हैं, पूरी आबादी पर नहीं।
दूसरे शहरों की तस्वीर भी राहत देने वाली नहीं है। दिल्ली-NCR में 34.4% लोगों के लीवर एंजाइम ज्यादा पाए गए, जो पांचों मेट्रो में सबसे ज्यादा है। बेंगलुरु में शुगर की समस्या सबसे कम जरूर है, लेकिन यहां 83.9% लोगों में विटामिन D की कमी पाई गई। वहीं, हैदराबाद में 50.6% लोगों का HDL कम पाया गया, जो दिल की सेहत के लिए खतरे की घंटी है। इसके अलावा शहरों के वर्गीकरण में मुंबई के साथ ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण, रायगढ़ और वसई-विरार के इलाके भी शामिल हैं।
रिपोर्ट में विटामिन की कमी की तस्वीर भी सामने आई है। 81.4% लोगों की विटामिन D रिपोर्ट में स्तर अपर्याप्त पाया गया, जबकि 73.9% लोगों में विटामिन B12 की कमी मिली। इसके अलावा एक दिलचस्प बात यह सामने आई कि 19.8% लोग सेहत से जुड़ी जानकारी के लिए ChatGPT जैसे AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 54% लोग आज भी डॉक्टर की सलाह पर भरोसा करते हैं। गौरतलब है कि कैंसर के छिपे कारण पर आई हालिया स्टडी में भी जीवनशैली से जुड़े खतरे सामने आए थे। पूरी रिपोर्ट की जानकारी ईटी हेल्थवर्ल्ड ने दी है।







