66.8% भारतीयों के खून में पाई गई ये गड़बड़, जानिए इसका बड़ा खतरा

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66.8% भारतीयों के खून में पाई गई ये गड़बड़, जानिए इसका बड़ा खतरा
ICMR-INDIAB राष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक 66.8% भारतीय वयस्कों में गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) की कमी सबसे आम लिपिड गड़बड़ पाई गई। फोटो साभार: BMI Doctors / Nebraska Medicine

देश में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, और अब ICMR-INDIAB की ताजा कोलेस्ट्रॉल स्टडी ने इसके पीछे एक नई और चौंकाने वाली वजह उजागर की है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल लिपिडोलॉजी में प्रकाशित इस राष्ट्रीय अध्ययन में 23,665 भारतीय वयस्कों के फास्टिंग लिपिड प्रोफाइल की जांच की गई। नतीजे वाकई हैरान करने वाले थे — 87.3 प्रतिशत लोगों के खून में लिपिड यानी वसा का स्तर असामान्य पाया गया। हालांकि सबसे बड़ी गड़बड़ वह नहीं थी, जिसके बारे में आमतौर पर सबसे ज्यादा चर्चा होती है।

अध्ययन के मुताबिक सबसे आम समस्या ‘खराब’ LDL कोलेस्ट्रॉल नहीं, बल्कि ‘अच्छे’ HDL कोलेस्ट्रॉल की कमी निकली, जो 66.8 प्रतिशत वयस्कों में पाई गई। इसके बाद 49.4 प्रतिशत में बढ़ा हुआ LDL, 29.5 प्रतिशत में हाई ट्राइग्लिसराइड और 22.1 प्रतिशत में बढ़ा हुआ कुल कोलेस्ट्रॉल दर्ज किया गया। वहीं महिलाओं में यह गड़बड़ पुरुषों से ज्यादा और शहरी इलाकों में ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक पाई गई। दरअसल कम HDL के साथ हाई ट्राइग्लिसराइड का खतरनाक संयोजन 22.5 प्रतिशत लोगों में मिला, जो दिल के दौरे और स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है।

कोलेस्ट्रॉल स्टडी: गुड कोलेस्ट्रॉल की कमी ही असली संकट

अब तक लोगों का सारा ध्यान ‘बैड’ कोलेस्ट्रॉल घटाने पर रहा है, लेकिन इस अध्ययन ने साफ कर दिया है कि शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा यानी HDL को बहाल करना भी उतनी ही बड़ी चुनौती है। HDL का काम धमनियों में जमी अतिरिक्त चर्बी को हटाकर दिल को बचाना होता है, और इसके घटने पर नसों में चर्बी धीरे-धीरे जमा होने लगती है। अध्ययन के वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. वी मोहन का कहना है कि हाई कोलेस्ट्रॉल का दर्द की तरह अहसास नहीं होता, रिपोर्ट के ये ‘चुपके वाले आंकड़े’ ही धीरे-धीरे धमनियों में रुकावट पैदा कर देते हैं। डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए यह खतरा और भी बड़ा है, जैसा कि डायबिटीज कंट्रोल पर हमारी पिछली रिपोर्ट में भी सामने आया था।

क्षेत्रीय स्तर पर मध्य भारत में 89.1 प्रतिशत के साथ सबसे ज्यादा असामान्यता मिली, जबकि पूर्वोत्तर में सबसे कम 85.3 प्रतिशत रही — यानी सबसे बेहतर इलाके में भी दस में से साढ़े आठ से ज्यादा वयस्क प्रभावित हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार निष्क्रिय जीवनशैली, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज इस संकट के बड़े कारण हैं, हालांकि 40 प्रतिशत ऐसे लोग भी प्रभावित मिले जिन्हें इनमें से कोई बीमारी नहीं थी। विशेषज्ञों की सलाह है कि रोजाना 30 मिनट टहलें, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम करें, स्वस्थ फैट खाएं और समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल की जांच कराएं। अब लड़ाई सिर्फ बैड कोलेस्ट्रॉल से नहीं, बल्कि गुड कोलेस्ट्रॉल को बचाने की भी है — जैसा कि टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में बताया गया है।

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