बचपन की ये अनदेखी चोट बाद में बन सकती है बड़ा खतरा! स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

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बचपन की ये अनदेखी चोट बाद में बन सकती है बड़ा खतरा! स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा
प्रतीकात्मक तस्वीर (स्रोत: मेडिकलएक्सप्रेस/Pexels-Chidi Young; ब्रेनफैक्ट्स/Society for Neuroscience)

बचपन में मिला प्यार और अपनापन बच्चे की जिंदगी तय करता है, लेकिन इसके उलट एक अनदेखी सी चीज — बचपन का नेगलेक्ट — दशकों बाद भी बड़ा असर डाल सकती है। हंगरी की Semmelweis University के शोधकर्ताओं ने 300 मानसिक रोगियों पर किए गए अध्ययन में पाया कि बचपन की उपेक्षा बाद में बार-बार आत्महत्या के प्रयासों से जुड़ी हो सकती है। यह स्टडी European Journal of Psychotraumatology में प्रकाशित हुई है।

वैसे नेगलेक्ट का मतलब मारपीट नहीं, बल्कि वह चीज है जो होती ही नहीं — बच्चे को पूछा न जाए कि उसका दिन कैसा रहा, या उसकी बुनियादी जरूरतें पूरी न हों। शोध की प्रमुख लेखिका Noémi Szeifert कहती हैं कि नेगलेक्ट के गंभीर और लंबे समय तक चलने वाले परिणाम हो सकते हैं, इसलिए इसके महत्व को कम नहीं आंकना चाहिए।

बचपन का नेगलेक्ट: स्टडी में क्या-क्या मिला

शोध में शामिल 300 मानसिक अस्पताल के मरीजों में इमोशनल नेगलेक्ट सबसे आम बचपन का ट्रॉमा पाया गया — 93% प्रतिभागियों ने इसका अनुभव बताया। 90% से ज्यादा प्रतिभागियों ने कम से कम दो तरह के बचपन के ट्रॉमा झेले थे, यानी मुश्किलें अक्सर अकेली नहीं आतीं। शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि जिन लोगों ने ज्यादा फिजिकल नेगलेक्ट झेला था, उनमें एक से ज्यादा बार आत्महत्या का प्रयास करने की संभावना ज्यादा थी। वहीं, इमोशनल और फिजिकल दोनों तरह के नेगलेक्ट का बार-बार के प्रयासों से संबंध मिला।

इमोशनल नेगलेक्ट का मतलब है भावनात्मक सहारे और सुरक्षा की भावना का लंबे समय तक अभाव — जब बच्चे को नियमित रूप से आराम, हौसला या अपनापन न मिले। जबकि फिजिकल नेगलेक्ट में बच्चे की बुनियादी जरूरतें — पर्याप्त भोजन, कपड़े या इलाज — लगातार पूरी नहीं होतीं। हालांकि, शोधकर्ता साफ कहते हैं कि बचपन के ट्रॉमा और बाद के आत्मघाती व्यवहार के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता। आत्मघाती व्यवहार जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों का जटिल मिश्रण है, हालांकि सुरक्षित रिश्ते इसके असर को कम कर सकते हैं।

स्टडी में यह भी बताया गया है कि शोषण या नेगलेक्ट के लक्षण हमेशा साफ नहीं दिखते, लेकिन कुछ बदलाव चेतावनी हो सकते हैं — जैसे व्यवहार में अचानक बदलाव, बढ़ी हुई चिंता, या पहले पसंदीदा गतिविधियों से दूरी। ये अकेले कुछ साबित नहीं करते, हालांकि ये बच्चे की मदद की जरूरत का संकेत हो सकते हैं। एक हंगेरियन अनुमान के अनुसार 30 में से सिर्फ 1 मामला आधिकारिक आंकड़ों में दिखता है। यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से जूझ रहा है, तो किसी स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य सेवा या क्राइसिस हेल्पलाइन से तुरंत मदद लें। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हमारी इंस्टाग्राम और तंबाकू की स्टडी भी पढ़ें, और इस शोध की पूरी जानकारी के लिए मेडिकलएक्सप्रेस की रिपोर्ट देखें।

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