36 रन पर ढेर होने के बाद भी कैसे जीती टीम इंडिया? रहाणे ने खोला वो ‘ब्लफ’ वाला राज, जानें पूरी कहानी

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36 रन पर ढेर होने के बाद भी कैसे जीती टीम इंडिया? रहाणे ने खोला वो ‘ब्लफ’ वाला राज, जानें पूरी कहानी
फोटो क्रेडिट: AFP / हिंदुस्तान टाइम्स और मायखेल के माध्यम से प्राप्त प्रेस तस्वीरों से बना कोलाज

पूर्व भारतीय कप्तान अजिंक्य रहाणे ने उस दौर की एक ऐसी कहानी साझा की है, जिसने पूरी क्रिकेट दुनिया को हैरान कर दिया था। अजिंक्य रहाणे ब्लफ की यह कहानी 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे से जुड़ी है, जब टीम इंडिया एडिलेड टेस्ट में महज 36 रन पर सिमट गई थी। हालांकि उस हार के बाद हर कोई भारत की 4-0 से हार की भविष्यवाणी कर रहा था, लेकिन रहाणे ने अंदर से घबराहट के बावजूद बाहर से पूरा आत्मविश्वास दिखाने का फैसला किया।

अजिंक्य रहाणे ब्लफ ने कैसे बदला ड्रेसिंग रूम का माहौल

रहाणे ने बुधवार 28 अक्टूबर को ‘बियॉन्ड बाउंड्रीज’ कार्यक्रम में बताया कि विराट कोहली के जाने के बाद कप्तानी संभालना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने साफ कहा कि वह सच में नर्वस थे, लेकिन यह घबराहट किसी को दिखने नहीं दी। वहीं, उन्होंने टीम के खिलाड़ियों से कहा कि भारत के लिए खेलना ही अपने आप में एक बड़ा सौभाग्य है, क्योंकि देश में लाखों युवा इसी मौके का सपना देखते हैं। इसके बाद खिलाड़ियों का ध्यान हार की भविष्यवाणियों से हटकर अपने खेल और जिम्मेदारी पर टिक गया।

उस दौरे में मुश्किलें सिर्फ स्कोरबोर्ड तक सीमित नहीं थीं, क्योंकि हर मैच के बाद दो-तीन खिलाड़ी चोटिल हो रहे थे। हालांकि टीम कमजोर होती जा रही थी, लेकिन रहाणे का संदेश यही था कि मैदान पर मौजूद खिलाड़ी ही देश की उम्मीद हैं। गाबा टेस्ट तक पहुंचते-पहुंचते टीम के पास महज 11 फिट खिलाड़ी बचे थे, फिर भी किसी के चेहरे पर हार मानने का भाव नहीं दिखा। इसी जज्बे ने भारत को मेलबर्न, सिडनी और ब्रिस्बेन में ऐतिहासिक नतीजे दिलाए।

गाबा की जीत क्यों आज भी खास मानी जाती है

ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर ऑस्ट्रेलिया को हराना इसलिए भी बड़ा माना जाता है, क्योंकि वहां मेजबान टीम दशकों से अजेय चली आ रही थी। वहीं, भारत की यह जीत कोरोना काल की पाबंदियों, क्वारंटीन और लगातार चोटों के बीच आई थी, जिसने इसे और भी यादगार बना दिया। रहाणे ने इस जीत का श्रेय पूरी टीम के हौसले को दिया। इसके बाद यह सीरीज भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रेरणादायक अध्यायों में दर्ज हो गई।

रहाणे की यह कहानी सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताती है कि मुश्किल समय में नेतृत्व का असली काम डर छिपाना नहीं, बल्कि टीम को भरोसा देना होता है। हालांकि उन्होंने इसे ‘ब्लफ’ कहा, लेकिन असल में यह एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसने नकारात्मक माहौल को सकारात्मक ऊर्जा में बदल दिया। भारतीय क्रिकेट की हालिया उपलब्धियों पर भी नजर डालें तो साफ है कि आत्मविश्वास अक्सर आंकड़ों से ज्यादा असर डालता है। इस पूरी कहानी की विस्तृत जानकारी NDTV स्पोर्ट्स की रिपोर्ट में भी पढ़ी जा सकती है।

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