सिर्फ शुगर ही नहीं! डायबिटीज की इस दवाई का दिल पर ऐसा असर कि डॉक्टर भी हैरान — जानिए सर्कुलेशन स्टडी का खुलासा

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सिर्फ शुगर ही नहीं! डायबिटीज की इस दवाई का दिल पर ऐसा असर कि डॉक्टर भी हैरान — जानिए सर्कुलेशन स्टडी का खुलासा
छवि: डायबिटीज दवाएं (स्रोत: Pharmacy Times) और डॉक्टर के हाथ में दिल (स्रोत: 3D Leisure)। कोलाज: TheFocusWorld

डायबिटीज की दवाई दिल के लिए भी उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। अमेरिका की वेंडरबिल्ट हेल्थ के वैज्ञानिकों ने पहली बार इंसानों पर हुए एक अध्ययन में पाया है कि SGLT2 इन्हिबिटर वर्ग की दवाएं खून में सूजन पैदा करने वाली खतरनाक कोशिकाओं को कम करती हैं, जो धमनियों को नुकसान पहुंचाने का काम करती हैं। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित हुआ है और इसने डॉक्टरों का ध्यान खींचा है। इंसानों पर यह पहला सीधा प्रमाण है।

डायबिटीज की दवाई दिल की रक्षा कैसे करती है?

अध्ययन में मोटापे और प्री-डायबिटीज से जूझ रही 16 महिलाओं को तीन महीने तक एम्पाग्लिफ्लोजिन नाम की दवाई दी गई। आधुनिक जेनेटिक सीक्वेंसिंग और सेलुलर इमेजिंग तकनीक से वैज्ञानिकों ने पाया कि मोनोसाइट-प्लेटलेट एग्रीगेट्स यानी MPAs में उल्लेखनीय गिरावट आई। ये MPAs दरअसल खून के थक्के बनाने वाली प्लेटलेट्स और इम्यून कोशिकाओं के गुच्छे होते हैं, जो नसों में सूजन बढ़ाकर दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं। महज दो हफ्तों में ही इनमें कमी दिखी और 12वें हफ्ते तक असर और मजबूत हो गया।

इसके बाद वैज्ञानिकों ने मोनोसाइट्स में ‘मेटाबॉलिक रीप्रोग्रामिंग’ भी दर्ज की — अति-सूजनकारी अवस्था से वे स्वस्थ ऊर्जा व्यवस्था की ओर लौट आईं। हालांकि वैज्ञानिक यह चेतावनी भी देते हैं कि यह एक छोटा पायलट अध्ययन था और इसमें प्लेसिबो नियंत्रण समूह शामिल नहीं था। दरअसल, तुलना के लिए एक ऐसा समूह भी रखा गया था जिसमें महिलाएं सिर्फ लो-कैलोरी डाइट पर थीं, लेकिन उनमें MPAs में कोई खास कमी नहीं दिखी।

वहीं इसका मतलब यह है कि दवाई का दिल को बचाने वाला असर सिर्फ वजन घटने की वजह से नहीं है, बल्कि इम्यून सिस्टम पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। न्यूज़-मेडिकल के मुताबिक, अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता डॉ. मोना मशयखी का कहना है कि अगर हम समझ लें कि ये दवाएं मोटापे से जुड़ी सूजन को कैसे शांत करती हैं, तो सही मरीजों की पहचान करना और दिल के लिए नई दवाएं खोजना आसान होगा। इसके बाद वैज्ञानिकों ने वेंडरबिल्ट हेल्थ में ही एक बड़ा रैंडमाइज्ड प्लेसिबो-नियंत्रित ट्रायल शुरू कर दिया है, जिसमें मोटापे और मेटाबॉलिक सिंड्रोम वाले 74 प्रतिभागी शामिल होंगे।

विशेषज्ञों की सलाह है कि यह खबर उम्मीद भरी जरूर है, लेकिन कोई भी मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना खुद डायबिटीज की दवाई न ले। सेहतमंद आहार, व्यायाम और वजन नियंत्रण अभी भी सबसे पुख्ता उपाय हैं। सही खानपान दिल की सेहत कैसे सुधारता है, यह हमने thefocusworld.com की ‘फूड इज मेडिसिन’ वाली रिपोर्ट में भी विस्तार से बताया था। हालांकि डॉक्टरों का मानना है कि SGLT2 दवाएं पहले से शुगर और वजन कम करने के लिए जानी जाती थीं, लेकिन अब इनका दिल-रक्षक रूप भी सामने आने लगा है।

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