भारतीय परिवारों की सेहत को लेकर सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है। अब लोग बीमार होने के बाद इलाज पर खर्च करने के बजाय पहले से ही प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर पैसा लगा रहे हैं। हेल्थकेयर स्ट्रैटेजी फर्म प्रोंटो कंसल्ट की नई रिपोर्ट ‘द ग्रेट केयर शिफ्ट’ में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक शहरी परिवार अब जांच, स्क्रीनिंग और वेलनेस को अपनी प्राथमिकता बना रहे हैं।
रिपोर्ट के लिए 2026 की पहली छमाही के दौरान 543 इंडस्ट्री हितधारकों के बीच 180 दिनों तक बाजार के रुझानों पर नजर रखी गई। आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ इलाज पर होने वाला खर्च 2025 की पहली छमाही के 84% से घटकर 81% रह गया है। वहीं जांच और बचाव से जुड़े खर्च में 16 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई है और यह 68% तक पहुंच गया है।
प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर बढ़ता भरोसा
रिपोर्ट के अनुसार डायग्नोस्टिक्स, रूटीन हेल्थ स्क्रीनिंग और एडल्ट वैक्सीनेशन पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही खास पोषण, सप्लीमेंट्स और फिटनेस ट्रैकिंग जैसी कैटेगरी में भी 18 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब 61% तक पहुंच चुकी है। मानसिक स्वास्थ्य, लंबी उम्र और लाइफस्टाइल हेल्थ पर ध्यान देने वालों की संख्या भी बढ़कर 43% हो गई है।
दरअसल, यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों की मानसिकता में भी साफ दिख रहा है। प्रोंटो कंसल्ट के प्रबंध निदेशक डॉ. हरि नटराजन के मुताबिक अब परिवार किसी स्वास्थ्य समस्या की पहले जांच कराना चाहते हैं। वहीं माता-पिता भी कमी या बीमारी का इंतजार करने के बजाय पोषण पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
खर्च की टोकरी में क्या-क्या शामिल है, यह भी रिपोर्ट में साफ किया गया है। खास पोषण और सप्लीमेंट्स के अलावा फिटनेस ट्रैकिंग डिवाइस पर भी परिवार खुलकर पैसा खर्च कर रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य के लिए थेरेपी ऐप्स, स्लीप ट्रैकर्स और मूड जर्नलिंग टूल्स की मांग भी चुपचाप बढ़ रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान अभी मुख्य रूप से शहरी इलाकों तक ही सीमित है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान अभी मुख्य रूप से शहरी इलाकों तक ही सीमित है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी इलाज-केंद्रित सोच हावी है। इसके बावजूद यह साफ है कि भारत में सेहत को लेकर एक नई ‘केयर इकोनॉमी’ आकार ले रही है, जहां बचाव ही सबसे बड़ा इलाज माना जा रहा है। युवाओं की सेहत से जुड़ी हमारी यह रिपोर्ट भी पढ़ें। (स्रोत: Gujarat Samachar)







