16 अक्टूबर 2026
चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर की रात 1:06 बजे से — इस बार व्रत गुरुवार को।
सुबह सूर्योदय से पहले सास की दी सरगी खाकर शुरू करें निर्जला व्रत।
शाम 5:38 से 6:56 बजे तक पूजा करें — शिव-पार्वती की कथा सुनें।
रात करीब 8:15–8:20 बजे चांद निकलेगा — छलनी से देखकर ही खोलें व्रत।
पूरा दिन बिना अन्न-जल का निर्जला व्रत — चांद को अर्घ्य देकर ही तोड़ें।
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